Bhayanak Ras (भयानक रस)


इसका स्थायी भाव भय होता है जब किसी भयानक या अनिष्टकारी व्यक्ति या वस्तु को देखने या उससे सम्बंधित वर्णन करने या किसी अनिष्टकारी घटना का स्मरण करने से मन में जो व्याकुलता उत्पन्न होती है उसे भय कहते हैं उस भय के उत्पन्न होने से जिस रस कि उत्पत्ति होती है उसे भयानक रस कहते हैं इसके अंतर्गत कम्पन, पसीना छूटना, मुँह सूखना, चिन्ता आदि के भाव उत्पन्न होते हैं


उदाहरण :

Bhayanak Ras ke Udaharan

अखिल यौवन के रंग उभार, हड्डियों के हिलाते कंकाल
कचो के चिकने काले, व्याल, केंचुली, काँस, सिबार

एक ओर अजगर हिं लखि, एक ओर मृगराय
विकल बटोही बीच ही, पद्यो मूर्च्छा खाय
रस के भेद

रस नौ प्रकार के होते हैं परन्तु वात्सल्य एवं भक्ति को भी रस माना गया हैं :

1. Shringar Ras (श्रंगार रस)
2. Hasya Ras (हास्य रस)
3. Veer Ras (वीर रस)
4. Karun Ras (करुण रस)
5. Shant Ras (शांत रस)
6. Adbhut Ras (अदभुत रस)
7. Bhayanak Ras (भयानक रस)
8. Raudra Ras (रौद्र रस)
9. Vibhats Ras (वीभत्स रस)

10. Vatsalya Ras (वात्सल्य रस)
11. Bhakti Ras (भक्ति रस)

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Bhayanak Ras in Hindi

What is definition / paribhasha of Bhayanak Ras in hindi grammar? भयानक रस Kya Hai and Bhayanak Ras ke Udaharan, Sthayi Bhav with some examples.

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