Veer Ras (वीर रस)


इसका स्थायी भाव उत्साह होता है इस रस के अंतर्गत जब युद्ध अथवा कठिन कार्य को करने के लिए मन में जो उत्साह की भावना विकसित होती है उसे ही वीर रस कहते हैं इसमें शत्रु पर विजय प्राप्त करने, यश प्राप्त करने आदि प्रकट होती है


उदाहरण :

Veer Ras ke Udaharan

चढ़ चेतक पर तलवार उठा करता था भूतल पानी को
राणा प्रताप सर काट-काट करता था सफल जवानी को

बुंदेले हर बोलो के मुख हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी

मानव समाज में अरुण पड़ा जल जंतु बीच हो वरुण पड़ा
इस तरह भभकता राजा था, मन सर्पों में गरुण पड़ा

क्रुद्ध दशानन बीस भुजानि सो लै कपि रिद्द अनी सर बट्ठत
लच्छन तच्छन रक्त किये, दृग लच्छ विपच्छन के सिर कट्टत

माता ऐसा बेटा जानिये
कै शूरा कै भक्त कहाय

हम मानव को मुक्त करेंगे, यही विधान हमारा है
भारत वर्ष हमारा है,यह हिंदुस्तान हमारा है

सामने टिकते नहीं वनराज, पर्वत डोलते हैं,
कौतता है कुण्डली मारे समय का व्याल
मेरी बाँह में मारुत, गरुण, गजराज का बल है
रस के भेद

रस नौ प्रकार के होते हैं परन्तु वात्सल्य एवं भक्ति को भी रस माना गया हैं :

1. Shringar Ras (श्रंगार रस)
2. Hasya Ras (हास्य रस)
3. Veer Ras (वीर रस)
4. Karun Ras (करुण रस)
5. Shant Ras (शांत रस)
6. Adbhut Ras (अदभुत रस)
7. Bhayanak Ras (भयानक रस)
8. Raudra Ras (रौद्र रस)
9. Vibhats Ras (वीभत्स रस)

10. Vatsalya Ras (वात्सल्य रस)
11. Bhakti Ras (भक्ति रस)

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Veer Ras in Hindi

What is definition / paribhasha of Veer Ras in hindi grammar? वीर रस Kya Hai and Veer Ras ke Udaharan, Sthayi Bhav with some examples.

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